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एलोपेसिया से होने वाले हेयर फॉल और गंजेपन जैसी समस्या,आइये जानते है इसके असली वजह !

एलोपेसिया क्या है :-

मौसम के बदलाव के बाद कई लोगो के बालो का झड़ना यु तो एक आम सी बात है |  इस दौरान कई लोगों के या तो बाल टूटकर गिरते ही रहते है या फिर बाल बहुत ही पतले हो जाते है | हलाकि यह परेशानी एक सीमित समय तक ही रहती है और कुछ ही दिनों में  यह समस्या दूर हो जाती है | वही कई लोगो के हेयर फॉल बहुत ज्यादा मात्रा में गिरते रहते है या फिर काफी समय से इस समयस्या से झुज रहे होते है , जिससे इन्हे गंजेपन जैसे समस्या से सामने करना पड़ जाता है | 

अगर आपके बाल गुच्छों में टूटकर गिर रहे है तो इसका मतलब यह है की आप एलोपेसिया हेयर फॉल जैसी समस्या से जूझ रहे है | एलोपेसिया एक ऑटोइम्म्युने डिसऑर्डर है ,जिसमे हेयर फॉल गुच्छों  में टूटकर गिरते  है और सिर  के एक हिस्से में पैचेस दिखाई देना शुरू कर देते है | इस तरह के पैटर्न को मेल पैटर्न हेयर फॉल भी कहा जाता है |  

आइये जानते है इसकी मुख्य कारण क्या है | 

एलोपेसिया हेयर फॉल के मुख्य कारण:- 

एलोपेसिया हेयर फॉल ज्यादातर पैचेस के पैटर्न में टूटकर गिरते या झड़ते है | इसका मुख्य कारण इम्यून सिस्टम का कमजोर  होना या ऑटोइम्म्युने डिसऑर्डर भी कहा जा सकता है | एलोपेसिया हेयर फॉल सिर्फ सिर के बालों पर ही नहीं चेहरे के अन्य जगह  जैसे की आइब्रो, पलकों और दाढ़ी  के बालों पर भी काफी प्रभाव डालती है | आइये जानिए इसके मुख्या कारण क्या है :-

  • स्ट्रेस या इमोशनल स्ट्रेस लेना 
  • इम्यून सिस्टम का कमजोर होना 
  • हाई फीवर या कई प्रकार के इन्फेक्शन का होना 
  • मेजर सर्जरी या ऑपरेशन 
  • मेडिसिन के साइड इफेक्ट्स 

एलोपेसिया हेयर फॉल होने के लक्षण :- 

  • बालों में कंघी मरने के बाद काफी बाल गुच्छों में टूट जाते है 
  • हर दिन सुबह बिस्तर पर टूटे हुए बालों का दिखाई देना 
  • आइब्रो या दाढ़ी के बालों का टूटकर गिर जाना 

एलोपेसिया हेयर फॉल का इलाज कैसे करे :- 

गुच्छों में होने वाले हेयर फॉल या पैचेस का कोई स्थायी इलाज नहीं है | अगर समय पर इसका इलाज ना करवाया गया आगे जा कर यह समस्या काफी बड़ी बीमारी की वजह बन सकती है | काफी मेडिकल ट्रीटमेंट है जैसे की  इंजेक्शन और लेज़र थेरेपी जो एलोपेसिया जैसे हेयर फॉल को रोकने में सक्षम है | इस मेडिकल ट्रीटमेंट की सलाह आप Dr. C Vijay Kumar से ले सकते है जो की कोस्मेटिलोगिस्ट्स एक्सपर्ट हैं और इनके पास 40 इयर्स का तजुर्बा है | 

लेज़र थेरेपी :-  

लेज़र थेरेपी और लाइट थेरेपी की सहायता से रहे पैचेस या गंजेपन के प्रभाव को कम का प्रयास किया जा सकता है | 

वही ,अगर कुछ बातों पर गौर करें तो डेली लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव से भी इस समस्या को काम करने का प्रयास किया जा सकता है जैसे की :- 

  • स्ट्रेस को कंट्रोल करना या नींद पूरी लेना 
  • हेअल्थी डाइट फॉलो करना 
  • डेली कसरत करना या मेडिटेशन करना 
  • हेयर प्रोडक्ट्स का सावधानी से प्रयोग करना 
  • योगासन करना
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Cosmetic Surgery Hindi

बेहतरीन फैक्ट्स जो आपकी मदद करते है, गायनेकोमास्टिआ और गायनेकोमास्टिआ सर्जरी को समझने में!

गाइनेकोमेस्टिया, पुरुषों में एक प्रचलित स्थिति है, जिसमें स्तनों में ग्रंथि ऊतक का विस्तार होता है। इसके परिणामस्वरूप सूजन या कोमलता हो सकती है, जो अक्सर हार्मोनल असंतुलन, दवा के दुष्प्रभाव, मोटापा या कुछ स्वास्थ्य स्थितियों के कारण होती है। इसे संबोधित करने के लिए, गाइनेकोमेस्टिया सर्जरी उन लोगों के लिए एक विकल्प बन जाती है जो अधिक स्पष्ट छाती की उपस्थिति चाहते है, तो चलिए समझते है गाइनेकोमेस्टिया और गाइनेकोमेस्टिया सर्जरी को ;

क्या है गाइनेकोमेस्टिया ?

  • सबसे पहले, गाइनेकोमेस्टिया को समझना महत्वपूर्ण है। और साथ ही यह तब होता है, जब हार्मोनल स्तर में असंतुलन होता है, विशेष रूप से एस्ट्रोजन में वृद्धि या टेस्टोस्टेरोन में कमी। यह असंतुलन ग्रंथि संबंधी स्तन ऊतक के विकास को उत्तेजित करते है। आमतौर पर, यह स्थिति नवजात शिशुओं, युवावस्था के दौरान किशोरों और जीवन के इन चरणों में हार्मोनल बदलाव के कारण वृद्ध पुरुषों को प्रभावित करती है।
  • इसके अलावा, गाइनेकोमेस्टिया कुछ स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हाइपरथायरायडिज्म, हाइपोगोनाडिज्म, लीवर या किडनी की विफलता, या एनाबॉलिक स्टेरॉयड, एंटी-एंड्रोजन और कुछ एंटीडिप्रेसेंट जैसी दवाओं के उपयोग से भी उत्पन्न हो सकता है। शराब, मारिजुआना, या हेरोइन से जुड़े मादक द्रव्यों का सेवन भी गाइनेकोमेस्टिया के विकास में योगदान कर सकता है।

यदि आप गाइनेकोमेस्टिया की समस्या का इलाज करवाना चाहते है, तो इसके लिए आपको विजाग में कॉस्मेटिक सर्जन का चयन करना चाहिए।

गाइनेकोमेस्टिया का उपचार क्या है ?

  • इसके उपचार के संबंध में गाइनेकोमेस्टिया सर्जरी, जिसे रिडक्शन मैमोप्लास्टी के नाम से जाना जाता है, एक प्रभावी उपाय है। इस सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान, अतिरिक्त स्तन ऊतक को हटा दिया जाता है, और कुछ मामलों में, अतिरिक्त वसा जमा को खत्म करने के लिए लिपोसक्शन का उपयोग किया जाता है। गाइनेकोमेस्टिया सर्जरी आम तौर पर एक बाह्य रोगी प्रक्रिया है, जो सामान्य एनेस्थीसिया के तहत की जाती है, और लगभग एक से दो घंटे तक चलती है।
  • इस प्रक्रिया में छाती पर छोटे चीरे लगाए जाते है, जिसके माध्यम से अतिरिक्त ग्रंथि ऊतक या वसा को बाहर निकाला जाता है। यदि अतिरिक्त वसायुक्त ऊतक को हटाने की आवश्यकता हो तो लिपोसक्शन का उपयोग किया जा सकता है। सर्जरी के बाद, रोगियों को हल्की असुविधा, सूजन और चोट का अनुभव हो सकता है, जो कुछ हफ्तों में कम हो जाता है।
  • सर्जरी के बाद, व्यक्तियों को उपचार में सहायता करने और छाती क्षेत्र को सहारा देने के लिए संपीड़न परिधान पहनने की सलाह दी जाती है। हल्की गतिविधियाँ एक सप्ताह के भीतर फिर से शुरू की जा सकती है, जबकि ज़ोरदार व्यायाम से कम से कम एक महीने तक बचना चाहिए।
  • गाइनेकोमेस्टिया सर्जरी के परिणाम आम तौर पर लंबे समय तक चलने वाले होते है, जो आत्मविश्वास बढ़ाने और छाती की अधिक स्पष्ट उपस्थिति में योगदान करते है। हालाँकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दुर्लभ मामलों में, संक्रमण, रक्तस्राव या संवेदना में बदलाव जैसी जटिलताएँ हो सकती है।
  • इसके अलावा, गाइनेकोमेस्टिया के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को समझना आवश्यक है। इस स्थिति का अनुभव करने वाले पुरुषों को अक्सर भावनात्मक संकट का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास पर असर पड़ता है। गाइनेकोमेस्टिया सर्जरी न केवल शारीरिक पहलू को संबोधित करती है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण में सुधार करने में भी सहायता करती है।

गाइनेकोमेस्टिया सर्जरी की पहचान क्या है ?

  • गायनेकोमास्टिआ आमतौर पर निप्पल क्षेत्र के नीचे एक रबड़ के द्रव्यमान की तरह महसूस करता है। एक सामान्य सूजन को द्विपक्षीय रूप से, या कुछ मामलों में एकतरफा रूप में भी देखा जा सकता है। यह सूजन हो भी सकती है और नहीं भी। यह अक्सर दर्द रहित होती है।
  • हालांकि, विशेष क्षेत्र में कुछ कोमलता या संवेदनशीलता देखी जा सकती है। यदि आप इनमें से किसी भी संकेत को देखते हैं, तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलने जाना चाहिए। जब आप एक डॉक्टर से परामर्श करते है, तो आपको पुरुष स्तन कैंसर के किसी भी संभावना का पता लगाने के लिए कुछ परीक्षण चलाने या मैमोग्राम के लिए जाने के लिए कहा जा सकता है।

ध्यान रखें :

यदि पुरुषों में स्तन ऊतक से जुडी किसी भी तरह की समस्या नज़र आती है तो इसके लिए उन्हें वी जे कॉस्मेटोलॉजी क्लीनिक का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

गाइनेकोमेस्टिया, जो पुरुष स्तन ऊतक के विस्तार की विशेषता है, हार्मोनल असंतुलन, कुछ स्वास्थ्य स्थितियों या दवा के उपयोग के परिणामस्वरूप हो सकता है। गाइनेकोमेस्टिया सर्जरी, एक सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया है, जिसमें अधिक मर्दाना छाती के आकार को बहाल करने के लिए अतिरिक्त ग्रंथि ऊतक या वसा को हटाना शामिल है। हालांकि संभावित जोखिमों और पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया को स्वीकार करना आवश्यक है, यह सर्जरी गाइनेकोमेस्टिया से जूझ रहे व्यक्तियों को आत्मविश्वास और मानसिक कल्याण की एक नई भावना प्रदान करती है।

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चेहरे के गोरेपन के लिए जानें कैसे मददगार है, वाइट स्किन ट्रीटमेंट?

आज के समय की अगर बात करे, तो हर एक व्यक्ति सुन्दर दिखने के लिए क्या कुछ नहीं करता है। कुछ लोग गोरा रंग पाने के लिए सर्जरी का सहारा लेते है तो कुछ लोग अच्छे सर्जन की तलाश करते है, की वो इस ट्रीटमेंट को उनसे करवा कर फेयर नेस ग्लो पा सके। तो आज के इस लेखन में हम गोरे रंग को कैसे पा सके उसके बारे में बात करेंगे। 

वाइट स्किन ट्रीटमेंट क्या है ?

स्किन लाइटनिंग ट्रीटमेंट या वाइट स्किन ट्रीटमेंट आपके चेहरे में निखार लाने का एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है, जिसका वर्णन हम निम्न में कर रहे ;

  • वाइट स्किन ट्रीटमेंट में ब्लीचिंग एजेंट, हाइड्रोक्वीनाइन का यूज होता है। इसे लगाने से स्किन में डार्कनेस के लिए जिम्मेदार मेलेनिन को कम किया जाता है, जिससे स्किन का रंग निखर जाता है। 
  • पर इसमें एक बात का आपको ध्यान रखना है कि इसे एक साथ पूरी बॉडी पर नहीं लगाना है। 

यदि चेहरे का ट्रीटमेंट करवाने के बारे में आप सोच रहे है तो विजाग में कॉस्मेटिक सर्जन से जरूर संपर्क करे। 

वाइट स्किन ट्रीटमेंट का खर्चा कितना आता है ?

  • भारत में लेजर उपचार और वाइट स्किन ट्रीटमेंट के लागत की अगर बात करे तो ये 30,000 से 60,000 रुपये के बीच में भी आ सकता है या इससे भिन्न भी हो सकता है। 
  • तो वही अगर आपने इस ट्रीटमेंट को नहीं करवाना है। तो आप त्वचा को गोरा करने वाली क्रीम भी ले सकते है, जिसकी कीमत तकरीबन 200 रुपये से लेकर 3000 रुपये के बीच में होगी।

वाइट स्किन ट्रीटमेंट की प्रक्रियाएं क्या है ?

  • वाइट स्किन ट्रीटमेंट को तीन से चार सीटिंग में किया जाता है। जिसको हम निम्न प्रस्तुत कर रहे ;

स्किन टोन

  • इस ट्रीटमेंट में सबसे पहले आपकी स्किन कैसी है, उसका टोन और टेक्सचर क्या है उसके बारे में जाना जाता है। 

स्किन पिगमेंट

  • स्किन का डार्क या फेयर होना स्किन पिगमेंट यानि की मेलानिन पर निर्भर करता है। 
  • वही जिस स्किन में ज्यादा मात्रा में मेलानिन निकलता है, वह ज्यादा शाइनिंग करती है और जिसमें कम मेलानिन निकलता है वह त्वचा ज्यादा सांवली दिखती है। 

स्किन ब्लीचिंग

  • स्किन ब्लीचिंग स्किन को फेयर करने का एक प्रोसेस है। इसके अलावा, मास्क, जेल, फेशियल जैसी चीजों का भी इस प्राेसेस में यूज किया जाता है। 
  • इसके इलावा लोग ब्लीचिंग क्रीम, फ़ेडिंग क्रीम, केमिकल पील्स और लेज़र ट्रीटमेंट जैसे वाइटनिंग या लाइटनिंग उत्पादों का उपयोग करते हैं। 

वाइट स्किन ट्रीटमेंट में किन बातों का रखे ध्यान ?

निम्न बातो का ध्यान रख कर आप अपने आप को इस सर्जरी के नुकसान से बचा सकते है ;

  • इस ट्रीटमेंट के बाद आपको कोई भी साबुन,क्रीम या मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल नहीं करना है। 
  • इस ट्रीटमेंट के तुरंत बाद आपको सूर्य की किरणों के सामने नहीं आना है। 

सुझाव :

यदि कालेपन की समस्या आपकी परेशानी का कारण बन गई है और इसको लेकर लोग आपका मजाक भी बना रहे है, तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्युकि अब आपकी परेशानी का हल VJ’s कोस्मेटोलॉजी क्लिनिक में आसानी से मिल जाएगा। क्युकि इस क्लिनिक में वाइट स्किन ट्रीटमेंट की मदद से व्यक्ति को आसानी से गोरा बनाया जा सकता है। 

निष्कर्ष :

सांवलेपन और कालेपन की समस्या से यदि आप भी परेशान है तो बिना समय गवाए किसी अच्छे कॉस्मेटिक सर्जन का चुनाव करे। लेकिन सर्जन को चुनने से पहले आपको उपरोक्त बातो का अच्छे से ज्ञात होना चाहिए।

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हाइपर पिगमेंटेशन (Hyper Pigmentation) को रोकने और कम करने के कौन-से तरीके है मददगार ?

परफेक्ट स्किन की चाहत किसकी नहीं होती। हालांकि, किसी की भी स्किन हर वक्त बेस्ट नहीं होती। मौसम बदलने, हार्मोनल बदलाव, खानपान में कमी, एक्सरसाइज़ की कमी, इन सभी का असर हमारी त्वचा पर पड़ता है। कई बार उमस की वजह से पिंपल्स आ जाते है, और फिर वे भद्दे दाग़ छोड़ जाते है। यानी पिगमेंटेशन (Skin Pigmentation) की समस्या से अक्सर लोग जूझते है। इसलिए पिगमेंटेशन के बारे में जानना बहुत ज़रूरी है। तो आइए जानते हैं कि पिगमेंटेशन क्या है, यह कितने तरह के होते है और इसका इलाज किस तरह संभव है ;

क्या है हाइपर पिगमेंटेशन (Hyperpigmentation)?

  • पिगमेंटेशन को त्वचा पर पड़ने वाले गहरे धब्बों के नाम से जाना जाता है। इसमें कहीं-कहीं से त्वचा का रंग काला होने लगता है। इसी को हाइपर-पिगमेंटेशन कहा जाता है। 
  • कुछ लोगों के चेहरे पर इसके निशान छोटे होते है, तो किसी के ज़्यादा बड़े हो जाते है। हालांकि, यह सेहत को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन दिखने में अच्छे नहीं लगते।
  • ये समस्या अकसर बहुत से लोगों में बदलते मौसम के दौरान देखी जाती है। और जिसके चलते उनके चेहरे पर तरह-तरह के दाग-धब्बे नज़र आने लगते है।

हाइपर पिगमेंटेशन (Hyperpigmentation) कितने तरह के होते है ?

  • स्किन पिगमेंटेशन दो तरह के होते है – हाइपर-पिगमेंटेशन और हाइपो-पिगमेंटेशन। 
  • हाइपर-पिगमेंटेशन में त्वचा के एक हिस्से का रंग बाकी हिस्सों से गहरा या काला हो जाता है। इसमें त्वचा पर धब्बे भी पड़ जाते है। हाइपर-पिगमेंटेशन का सबसे बड़ा कारण त्वचा में मेलानिन का स्तर बढ़ जाने के कारण होता है। वैसे तो यह एक सामान्य समस्या है, लेकिन इसके होने पर लोगों के चेहरे में धब्बे नज़र आते है और उनके आत्मविश्वास में कमी आ जाती है। वे अपनी त्वचा को लेकर निराश हो जाते है। 
  • हाइपोपिगमेंटेशन में त्वचा का रंग सामान्य से हल्का होता है। और इसमें ऐसे निशान/पैच त्वचा के ऊपर बन जाते है, जो आसपास की सामान्य त्वचा की तुलना में कम अच्छे लगते है। हाइपोपिगमेंटेड मैक्युल त्वचा के लिज़न में सबसे ज्यादा सामने आने वाली तकलीफ है, इस समस्या में व्यक्ति को डॉक्टर का सहारा भी लेना पड़ सकता है।

अगर स्किन पिगमेंटेशन के कारण आपके चेहरे पर दाग-धब्बे या पिंपल निकल आए है, तो इससे बचाव के लिए आपको विजाग में पिंपल का इलाज करवाना चाहिए।

हाइपर पिगमेंटेशन (Hyperpigmentation) के क्या कारण है ? 

  • सूरज से निकलने वाली यूवी किरणें त्वचा के लिए काफी हानिकारक मानी जाती है। जिससे हाइपर-पिगमेंटेशन की समस्या शुरू होती है। जो चेहरे की सुंदरता पर दाग लगा देती है।  
  • कई दवाइयां भी होती है, जिसके रिएक्शन से हाइपर-पिगमेंटेशन की समस्या होती है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोन स्तर में बदलाव आता है, जिसकी वजह से महिलाओं में मेलानिन के उत्पादन पर असर पड़ता है। और ये समस्या देखने को मिलती है। 
  • त्वचा में सूजन का उत्पन्न होना हाइपरपिग्मेंटेशन का एक प्रमुख कारण है।

आप चेहरे पर आए सामान्य दाग-धब्बों को भारत में कॉस्मेटिक सर्जन की मदद से ठीक करवा सकते है। 

हाइपर पिगमेंटेशन (Hyperpigmentation) के लक्षण क्या है ?

  • ज्यादातर हाईपरपिगमेंटेशन में काले, भूरे, लाल, गुलाबी या ग्रे रंग के धब्बे त्वचा पर नज़र आते है। 
  • डार्क स्पॉट्स के अलावा, हाइपर पिगमेंटेशन के कोई और लक्षण नहीं होते है।
  • हाइपर पिगमेंटेशन के लक्षणों को जानकर और समय पर इसका इलाज करवा के इस तरह की समस्या से आप खुद का बचाव आसानी से कर सकते है। 

हाइपर पिगमेंटेशन से कैसे करें खुद का बचाव ?

  • हाइपर पिगमेंटेशन से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप डायरेक्ट सनलाइट यानी यूवी किरणों से बचकर रहें।
  • घर से बाहर निकलते वक्त या चाहे आप घर पर ही क्यों न हों, हमेशा एक अच्छी सनस्क्रीन का उपयोग करें। सनस्क्रीन कम से कम 30 एसपीएफ की होनी चाहिए।
  • चेहरे को कम से कम हाथ लगाएं। इससे त्वचा पर किसी भी तरह का इंफेक्शन नहीं होगा। क्युकी अगर हमारे द्वारा चेहरे की त्वचा पर बार-बार हाथ लगाया जाता है तो इससे एक्ने/पिंपल्स की समस्या बढ़ जाती है।
  • स्किन केयर रुटीन में नियासिनामाइड (niacinamide), रेटिनॉल (retinol) और विटामिन-सी का इस्तेमाल भी करें।
  • इससे पहले समस्या ज़्यादा बढ़े एक अच्छे स्किन स्पेशलिस्ट को ज़रूर दिखाएं।

हाइपर पिगमेंटेशन (Hyperpigmentation) का इलाज कैसे किया जा सकता है ?

  • जीवन शैली में बदलाव और रोकथाम लाकर उपचार को सफल बनाया जा सकता है। 
  • सीधी धूप से बचना, सनस्क्रीन का उपयोग करके और सुरक्षात्मक कपड़े पहनकर धूप से होने वाली त्वचा की क्षति से खुद का बचाव करना।
  • अगर कोई दवा पिगमेंटेशन की वजह है, तो उसे रोका जा सकता है। 
  • रक्त परीक्षण मे अगर विटामिन की कमी सामने आई है, तो डॉक्टर की निगरानी में विटामिन लेना शुरू किया जा सकता है।
  • इसके अलावा इसका इलाज रासायनिक घोल का उपयोग करके त्वचा की उन परतों को हटाने के लिए किया जाता है जो नीचे की अधिक युवा त्वचा को प्रकट करती है।
  • क्रायोथेरेपी एक उपचार है, जहां डॉक्टर असामान्य ऊतक को जमने और नष्ट करने के लिए अत्यधिक ठंडी चीज को त्वचा के दाग वाले हिस्से में लगाते है।
  • लेजर रिसर्फेसिंग पिगमेंटेशन को कम करने के लिए लेजर का उपयोग करें।
  • लेजर का त्वचा पर विभिन्न प्रकार के पिग्मेंटेड घावों का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

हाइपर पिगमेंटेशन (Hyperpigmentation) को कम कैसे किया जा सकता है ?

  • हाइपर पिगमेंटेशन को कम करने के लिए आप कुछ घरेलु उपायों को अपना सकते है, जैसे ;
  • कोको बटर त्वचा को पोषण देने के साथ नमी भी देते है। कोको बटर के इस्तेमाल से त्वचा में निखार आता है।
  • कच्चा आलू भी पिगमेंटेशन से राहत दिलाने का काम कर सकता है। इसे छीलकर स्किन पर हल्के हाथों से मसाज करे।
  • नींबू और शहद को मिलाकर त्वचा पर लगाने से ज़िद्दी दाग और धब्बों से छुटकारा मिल सकता है। नींबू में मौजूद एसिडिक गुण दाग-धब्बे हटाने का काम करतें है, वहीं शहद त्वचा में कसाव लाता है और प्राकृतिक तौर पर पोषण भी देता है।
  • गहरे दाग़ से छुटकारा पाने के लिए एक चम्मच चंदन पाउडर, आधा चम्मच ग्लिसरीन और एक चम्मच गुलाबजल लें। यह सारी सामग्री एक बाउल में डालकर पेस्ट बना लें। अब इसे चेहरे पर लगाकर सूखने दें और फिर धो लें। इसे आप रोज़ लगा सकती है।
  • इन उपायों को अपनाने से आप कुछ ही दिन में देखेंगे की आपके चेहरे के दाग धब्बे गायब हो सकते है।

ध्यान रखें :

अगर आपकी त्वचा पर काफी गंभीर दाग नज़र आए, तो इसके लिए आपको हाथ पर हाथ रख कर नहीं बैठना चाहिए, बल्कि इसके इलाज के लिए आपको जल्द डॉक्टर का चयन करना चाहिए। 

सुझाव :

चेहरे पर आपके अगर काफी दाग-धब्बे नज़र आने लगें तो इसके लक्षणों को कृपया हल्के में लेने की भूल न करें, बल्कि इसके इलाज के लिए आपको वी जे कॉस्मेटोलॉजी क्लीनिक का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

चेहरे पर आए एक भी दाग आपके चेहरे की सुंदरता को ख़राब कर देते है, इसलिए इससे बचाव के लिए जरूरी है की आपको इसके लक्षणों का खास ध्यान रखना चाहिए और समस्या गंभीर होने से पहले ही आपको डॉक्टर का चयन करना चाहिए और किसी भी तरह की दवाई का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

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अगर चेहरे पर पिंपल ने किया है आक्रमण – तो इसके उपाय अपनाकर पाए बेदाग चेहरा !

चेहरे पर पिंपल का निकलना मतलब चेहरे की सुंदरता पर दाग लगने की शुरुआत हो जाती है। वहीं चेहरे पर पिंपल अगर निकल जाए तो हम इससे कैसे खुद का बचाव कर सकते है, वहीं पिंपल निकलने के क्या कारण हो सकते है। इसके अलावा पिंपल वाले चेहरे को किन चीजों से बचा कर रखना चाहिए इसके बारे में सम्पूर्ण लेख में चर्चा करेंगे, तो अगर आप भी बेदाग चेहरा चाहते है तो इसके लिए आपको इस छोटे से लेख के साथ अंत तक बने रहना है ;

चेहरे को किन तरीको से बनाए बेदाग ! 

  • खीरे का एक टुकड़ा कद्दूकस करके इसमें दो से तीन बूंद नींबू का रस डालें और इसे मिक्स करके अपने त्वचा पर 10 से 15 मिनट के लिए लगाएं और फिर ताजे पानी से धोकर साफ कर लें, इसके बाद मॉइश्चराइजर लगाएं। 
  • आधा चम्मच शहद लें और इसमें नींबू के रस की दो से तीन बूंदें मिला लें, अब इसे मिक्स करके 15 से 20 मिनट के लिए त्वचा पर लगाएं और फिर पानी से धोकर साफ कर लें, मॉनसून में इसे धोने के लिए गुनगुने पानी का उपयोग करें। 
  • चेहरे पर बेंजोइल पैरोक्साइड या फिर विटमिन-ए युक्त क्रीम और लोशन का उपयोग करें, ये आपकी त्वचा पर दाग-धब्बों को लंबे समय तक टिकने नहीं देते है।
  • हल्दी युक्त घरेलू फेस पैक चेहरे पर लगाएं, आप हल्दी और बेसन के उपयोग को नहीं करना चाहते है, तो मुलतानी मिट्टी, चंदन पाउडर और गुलाब जल मिलाकर फेस पैक तैयार करें और 20 से 25 मिनट के लिए इसे लगाएं, और फिर नार्मल पानी से मुँह धो लें, जिससे आपके चेहरे के दाग धब्बे भी गायब होंगे और साथ चेहरे पर उत्पन्न हुए पिंपल का भी खात्मा होगा।

चेहरे पर पिंपल निकलने के क्या कारण हो सकते है ?

  • गर्भावस्था या मासिक धर्म के दौरान महिलाओं में हार्मोन लेवल का बढ़ना और घटना लगा रहता है, जिसके कारण उनके चेहरे पर मुंहासे निकल आते है। 
  • खेलते वक्त हेलमेट या टोपी जैसी चीजों को पहनने से स्किन पर पड़ने वाले दबाव के कारण स्किन पर मुंहासे निकल सकते है। 
  • बालों के लिए यूज किए जाने वाले प्रोडक्ट्स जैसे हेयर पोमेड्स, हैवी लोशन, क्रीम, वैक्स आदि के इस्तेमाल से भी मुंहासे आ सकते है। 
  • पर्यावरण, या आस-पास के वातावरण के कारण भी चेहरे पर मुंहासे निकल आते है। 
  • वायु प्रदूषण भी इसके कारण में शामिल है। 
  • गर्भ निरोधक गोलियों का अधिक प्रयोग करने के कारण भी आप इस तरह की समस्या का सामना कर सकते है। 
  • वहीं चेहरे पर उत्पन्न हुए पिंपल से अगर आप अपना बचाव करना चाहते है, तो बार-बार चेहरे को धोने से बचें।

अगर आपका पूरा चेहरा पिंपल से भर गया है, तो इससे बचाव के लिए आपको विजाग में पिंपल का इलाज करवाना चाहिए।

चेहरे पर पिंपल निकलने के कितने प्रकार है ?

चेहरे पर निकलने वाले पिंपल के कई प्रकार है, और इन सभी प्रकार के पिंपल को जानना बहुत जरूरी है हमारे चेहरे के लिए, तो जानते है इन सभी प्रकार के चेहरे के पिंपल्स के बारे में ; 

  • ब्लैकहेड्स, जोकि आपकी स्किन पर मौजूद काले रंग के जिद्दी दाग होते है, जो डेड स्किन सेल्स और अतिरिक्त ऑयल के कारण स्किन पोर्स के खुल जाने पर होते है। इन पोर्स में मौजूद ऑयल, हवा के संपर्क में आने के कारण काले हो जाते है।
  • व्हाइटहेड्स तब होते है, जब डेड स्किन सेल्स और ऑयल से पोर्स बंद हो जाते है।
  • छोटे-छोटे लाल थक्के तब होते है, जब आप अपने चेहरे को ज्यादा छूते है और इन्हें छूने पर दर्द होता है।
  • पिंपल्स जोकि छोटे-छोटे लाल थक्के के रूप में आपकी स्किन पर एक सफेद टिप की तरह दिखाई देते है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि पिंपल्स, मवाद से भरे होते है।
  • गांठ वाले मुंहासे या पिंपल आपकी स्किन में गहराई से छिपे होते है, जो काफी ठोस होते है।
  • सिस्ट, जोकि मवाद से भरी बड़ी गांठ होती है, जो मुंहासों का सबसे गंभीर रूप है और इससे आपकी स्किन पर स्थायी निशान भी पैदा हो सकते है।

पिंपल वाले चेहरे के प्रकार को जानने के बाद इसके बचाव के लिए आपको भारत में कॉस्मेटिक सर्जन का चयन करना चाहिए।

पिंपल से कैसे करें खुद का बचाव ?

  • अपने चेहरे को रोजाना माइल्ड फेस क्लींजर और गर्म पानी से धोएं।
  • नियमित रूप से मॉइस्चराइजर का प्रयोग करें।
  • चेहरे को छूने से बचें।
  • जो लोग मेकअप करते है उन्हें “गैर-कॉमेडोजेनिक” लेबल वाले उत्पादों का उपयोग करना चाहिए ताकि वह उत्पाद आपके छिद्रों के पार न जाए। 
  • सोने से पहले अपने मेकअप को हटाना बिलकुल न भूले।

पिंपल या मुंहासे का इलाज डॉक्टर के द्वारा कैसे किया जाता है ?

  • डॉक्टर पिंपल के इलाज के लिए प्रभावित व्यक्ति की आयु को जानते है पहले। 
  • फिर मुंहासे के प्रकार के बारे में जानते है। 
  • किस स्थान पर मुंहासे हुए है, इसके बारे में भी डॉक्टर मरीज से जरूर पूछते है।  
  • मुंहासे कैसे आए है, इसके बारे में भी डॉक्टर जानने की कोशिश करते है। 
  • अतीत में कोई उपचार किया गया है मुंहासे का या नहीं इसके बारे में भी वो जानने की कोशिश करते है।
  • मुंहासे के कारण होने वाले काले धब्बे या निशान कैसे दिखाई दे रहे है, इसको भी डॉक्टर के द्वारा देखा जाता है।
  • इसके अलावा मुंहासे के उपचार के लिए डॉक्टर आपको ट्रॉपिक्ल दवाओं जैसे जेल, क्रीम, लोशन या सॉल्यूशन को स्किन पर लगाने की सलाह दे सकता है। वहीं डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली प्रमुख दवाओं में निम्न दवाइयां शामिल है ;
  • बेंजोयल पेरोक्साइड (बैक्टीरिया को नष्ट करने की दवा)
  • नए मुंहासे को आने से रोकने के लिए टैजरोटीन, ट्रेटीनोइन और एडापेलीन जैसे रेटिनोइड्स।
  • एरिथ्रोमाइसिन और क्लिंडामाइसिन जैसे एंटीबायोटिक्स दवाई को देना, ताकि मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया के विकास को धीमा किया जा सके।
  • व्हाइटहेड्स और ब्लैकहेड्स से भरे ऑयल और डेड स्किन सेल्स को खाली करने के लिए सैलिसिलिक एसिड।
  • अन्य दवाएं जैसे – डैप्सोन (Dapsone) और एजीलैक (azelaic) एसिड आदि। 
  • पर ध्यान रहें चेहरे का मामला है इसलिए किसी भी तरह की दवाई का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लें। 

सुझाव :

चेहरे पर पिंपल के कारण अगर आप काफी परेशान है तो इससे बचाव के लिए आपको वी जे एस कॉस्मेटोलॉजी क्लिनिक का चयन करना चाहिए। और साथ ही चेहरे के बचाव के लिए किन बातो का खास ध्यान रखना चाहिए कृपया उसे भूले ना।

निष्कर्ष :

चेहरे पर निकले पिंपल से हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है, इसके बारे में हम उपरोक्त बता चुके है, लेकिन अगर चेहरे पर गंभीर पिंपल निकल रहें है या आपका पूरा मुँह पिंपल से भरा हुआ है तो ऐसे में आपको डॉक्टर के संपर्क में आना चाहिए। और किसी भी तरह के उपचार को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।